सचिन पायलट ने 14 अप्रैल को कहा था- देरी का कोई कारण नहीं दिख रहा
पायलट ने 14 अप्रैल को कहा था, 'कई महीनों पहले एक कमेटी बनी थी। मुझे विश्वास है कि अब और ज्यादा देरी नहीं होगी। जो चर्चाएं की थीं और जिन मुद्दों पर आम सहमति बनी थी, उन पर तुरंत प्रभाव से कार्रवाई होनी चाहिए और ऐसा होगा मुझे लगता है। मुझे सोनिया गांधी पर पूरा विश्वास है, उनके आदेश पर ही कमेटी बनी थी। अभी कमेटी में दो सदस्य हैं। उपचुनाव और पांच राज्यों के चुनाव थे, वे भी खत्म होने को हैं तो मुझे नहीं लगता कि अब कोई ऐसा कारण है कि उस कमेटी के फैसलों को लागू करने में और देरी होगी।'
पायलट के ताजा बयान से फिर कांग्रेस में चर्चाओं का दौर
सचिन पायलट के ताजा बयान से एक बार फिर कांग्रेस की अंदरूनी सियासत गर्मा गई है। पायलट का बयान ऐसे वक्त आया है जब उनके एक समर्थक हेमाराम चौधरी ने इलाके के विकास के कामों की अनदेखी के मुद्दे पर 18 मई को इस्तीफा दे दिया था। वहीं दो दिन पहले सचिन पायलट खेमे के विधायक पीआर मीणा ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बजट की तीन महीने बाद जमकर तारीफ की है। बताया जा रहा है कि मीणा का बयान भी मुख्यमंत्री खेमे की तरफ से जारी करवाया गया। अब सचिन पायलट के ताजा बयान के बाद उनकी नाराजगी एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है।
सुलह कमेटी की रिपोर्ट का 10 महीने से इंतजार, पायलट खेमे का सब्र टूट रहा
पिछले साल सचिन पायलट खेमे की बगावत के बाद 11 अगस्त को कांग्रेस ने केसी वेणुगोपाल, अहमद पटेल और अजय माकन को शामिल करते हुए एक कमेटी बनाई थी। इस सुलह कमेटी का काम सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों की मांगों को सुनकर उसके आधार पर हाईकमान को रिपोर्ट देना था। कमेटी के एक मेंबर अहमद पटेल का देहांत हो चुका है। इस कमेटी को बने 10 माह बीत चुके हैं, लेकिन अब तक उसकी रिपोर्ट का अता-पता नहीं है। सचिन पायलट ने उस वक्त ही कहा था कि यह कमेटी तत्काल रिपोर्ट देगी और उस पर एक्शन होगा। लेकिन अब मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से पायलट खेमे का सब्र जवाब दे रहा है।

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